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बाणभट्ट का जीवन परिचय संस्कृत में | Banbhatt Biography in Sanskrit

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Banbhatt Biography in Sanskrit

बाणभट्ट का जीवन परिचय संस्कृत में Banbhatt Biography in Sanskrit

बाणभट्टस्य पितुः नाम चित्रभानुः मातुश्च राज्यदेवी आसीत्। जननानन्तरमेव अयं मातृसुखविहीनोऽभवत्। दौर्भाग्येन उपनवन संस्कारानन्तरमेव अयं पितृविहीनोऽपि जातः । बाणस्य पार्श्वे पैतृकं प्रचुरं धनमासीत्। मित्राणिनैकविधस्वभावकानि आसन् विद्वांसः चौराः, नर्तकाः, नटाः, ऐन्द्रजालिकादयः सर्वे बाणप्रिया आसन्। कालान्तरे स्वगुणैर्विद्वत्तया च बाणः हर्षदेवस्य राजकविजतः। हर्षवर्धíनस्तं ‘वश्यवाणीकविचक्रवर्ती’ उपाधिनाऽभूषयत् । बाणभट्टस्य जन्मभूमिः प्रीतिकूटसमीपे आसीत्। ऐतिहासिकैरस्य कालः 450-480 ईस्वीयाब्द; स्वीकृतः । ‘हर्षचरितम्’ बाणस्य प्रथमा गद्यकृतिरस्ति । कल्पनाप्रचुरायां अलंकारपूरितायां शैल्यां तात्कालिकसामाजिक व्यवस्था, राजनीतिकादर्शदशा दर्शनीयैव । पितृव्यभ्रात्रा श्यामलेन हर्षचरिते श्रवणेऽभिरुचिः प्रकटिता तदाबाणभट्टेन तं श्रावयितुं हर्षचरितं विरचितम्। अस्मिन् ग्रन्थे बाणेन स्वकीयं जीवनवृत्तं काव्यसौष्ठवपूर्वकं व्यरचि । राज्ञो हर्षवर्धनस्य चरितम् तस्य वैभवम्, प्रभावम् च जीवनादिमरणान्तं व्यरचयत् ।

कादम्बर्यामवान्तरकथानामाधिवयभवनेऽपि तस्याः नैसर्गिकविकासे नास्ति क्वचिदतिविरोधः । कादम्बरी मुख्या नायिका तस्याश्चर्चा ग्रन्थारम्भे न विद्यतेऽपि तु मध्ये कृता, अतः पाठकानामुत्तरोत्तरमुत्कण्ठा वर्धते। उपोद्घाते महाश्वेतायाः प्रणयकथा विद्यते, प्रारम्भे शूद्रकनृपतेः सभायामद्भुतेन शुकेन सह चाण्डालकन्यायाः प्रवेशः प्रदर्शितः ।

‘कादम्बरी’ ग्रन्थस्य पात्राणि भूलोकतः स्वर्गलोकपर्यन्तं पर्यटन्ति । कथायां बाणवृत्तिस्तादृशी न रमते यादृशी- अप्रासंगिक वर्णनेषु तथापि तस्य पात्राणि व्यक्तित्वसहितानि सन्ति । शुकनासनामकमन्त्रिणश्चरित्रचित्रणम्, श्वेतवसनभूषितायाः, तपस्विकन्याः- महाश्वेतायाश्चरित्रचित्रणं कादम्बर्याश्चानुपमं स्वरूपवर्णनम् पाठकानां हृदये स्वप्रभावमङ्कयन्ति । Banbhatt Biography in Sanskrit

बाणभट्ट का संक्षिप्त जीवन परिचय संस्कृत भाषा में

बाणभट्ट का जीवन परिचय संस्कृत में, वाणी बाणो बभूव हि, मम प्रेयान् कविः, बाणोच्छिष्टं जगत्सर्वम् , बाणभट्टः, बाणस्तु पञ्चाननः आदि का संस्कृत में निबंध दिया है। Banbhatt Biography in Sanskrit

बाणभट्ट का जीवन परिचय हिंदी में

(निम्न लिखित जीवन परिचय जो हिंदी में लिखा गया है यह उपरोक्त बाणभट्ट का जीवन परिचय संस्कृत में का अनुवाद नहीं है ।)

बाणभट्ट का जन्म 6वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था. उनके पिता का नाम चित्रभानु और माता का नाम राजदेवी था. बाणभट्ट ने संस्कृत भाषा और साहित्य का गहन अध्ययन किया. वे एक कुशल कवि और गद्यकार थे.बाणभट्ट ने हर्षवर्धन के दरबार में प्रवेश किया और उनके राजकवि बन गए ।

उन्होंने हर्षवर्धन के जीवन और उनके युद्धों का वर्णन हर्षचरित में किया है। यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है । बाणभट्ट ने कादंबरी भी लिखी है. यह ग्रंथ एक काल्पनिक कथा है जो प्रेम, रोमांच और हास्य से भरी है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक अद्वितीय उदाहरण है.बाणभट्ट का जीवन और उनकी रचनाएं संस्कृत साहित्य के लिए एक अमूल्य योगदान हैं. वे एक महान कवि और गद्यकार थे जिन्होंने संस्कृत साहित्य को समृद्ध किया ।

बाणभट्ट की प्रमुख रचनाएं

* हर्षचरित* कादंबरी* मुद्राराक्षस* कृतिवास* काव्याकर* श्लोकवार्तिक*

अष्टांगहृदयम्बाणभट्ट की रचनाओं का भारतीय साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है. वे संस्कृत साहित्य के सबसे महान कवियों और गद्यकारों में से एक हैं।

यहां बाणभट्ट की कुछ प्रसिद्ध रचनाओं के बारे में अधिक जानकारी दी गई है:

1.हर्षचरित:**

यह ग्रंथ हर्षवर्धन के जीवन और उनके युद्धों का वर्णन करता है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

2.कादंबरी:**

यह ग्रंथ एक काल्पनिक कथा है जो प्रेम, रोमांच और हास्य से भरी है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक अद्वितीय उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

3.मुद्राराक्षस:**

यह ग्रंथ एक काल्पनिक कथा है जो राजनीति और साजिश के विषयों से संबंधित है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

4.कृतिवास:**

यह ग्रंथ एक काव्य संग्रह है जो विभिन्न विषयों पर आधारित है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

5.काव्याकर:**

यह ग्रंथ काव्यशास्त्र पर एक ग्रंथ है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

6.श्लोकवार्तिक:**

यह ग्रंथ वाल्मीकि रामायण पर एक टिप्पणी है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है।

7.अष्टांगहृदयम्:**

यह ग्रंथ आयुर्वेद पर एक ग्रंथ है. यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे कई बार अनुवाद किया गया है.बाणभट्ट के जीवन और उनकी रचनाएं संस्कृत साहित्य के लिए एक अमूल्य योगदान हैं.

वे एक महान कवि और गद्यकार थे जिन्होंने संस्कृत साहित्य को समृद्ध किया.

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